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Sunday, 4 December 2011

गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो


गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो


मेरा कहानी आईडिया लिखना   फिर डिरेक्टर  और प्रोडूसर , एक्टर को बैठ कर उसे विस्तार से  बताना शौक नहीं है पेशा है . चाहे उस पर काम करे या  नहीं करे | अभी  भी जब खाली समय होता है तो ये काम करने मै डिरेक्टर  और प्रोडूसर  के पास पहुच जाता हु | 

देव साब को से  २००३ में मिला था वह भी फिल्म के आईडिया की सिलसिले में ? मेरे दिमाग में काफी दिनों से एक आईडिया कुलबुला रहा था | वह बोले तुम घर चले आओ |

 पहली बार जिन्दा दिल  इन्सान से मिल रहा था | देव बोले अभी तो मैंने सफ़र शुरू किया है | मंजिल दूर है | कभी भी न थकने वाले इन्सान दूर चला गया | मन को चोट लगी | दिल में दर्द हुआ | 

मैंने जब आईडिया सुनाना शुरू किया तो बीच में रोकते हुए बोले  , गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो जो कभी ख़राब नहीं होती है | वह अपनी यादे छोड़ जाती है |

बॉलीवुड में रहकर दूसरे कलाकारों प्रेरित करना देव की साब की अपनी पहचान थी |  देव ने मेरी आखो में झुकर देखा और कहा , तुम लिखते रहो , अच्छा लिखते हो | तुम कहानीकार बन सकते हो | तुम्हारी आखो  में सच्चाई नजर आती है | वह मुलाकात मेरे जीवन की यादगार मुलाकात थी | जिसे मै पूरी उम्र नहीं भुला सकता हु |

सुशील गंगवार पिछले ११ बर्षो से प्रिंट , इलेक्ट्रोनिक , वेब मीडिया के लिए काम कर रहे है | वह साक्षात्कार.कॉम , साक्षात्कार टीवी. कॉम और साक्षात्कार. ओर्ग के संपादक है | 

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Thursday, 24 November 2011

worldagainstcorruption.org



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Saturday, 12 November 2011

I'm not getting married: Kareena Kapoor





Actress Kareena Kapoor, who is only too happy, to have been the first to star opposite all the Khans and is on cloud nine that her movies are doing well at the box office, says she is in a happy phase of life.

After all the actress is all set to tie the knot in February 2012, right? "Wrong!" says the Bebo! "It's great that people have set my wedding date, have designed my wedding dress and planned my honeymoon without me being aware of it! It's flattering, but no, I'm not getting married, yet!"

On further pushing, Kareena said, "Saif and I are happily in love and happy with each other; We are taking our time. And I assure you, nothing - absolutely nothing - is fixed as yet: no marriage date, no marriage dress, nothing!"

Kareena says the next big thing she is looking forward to is Agent Vinod. "It's a special film. The movie is made on a huge canvas. I am hoping it'll be my next hit. Our fingers are crossed. We have worked so hard on it. Let's hope the effort is worth it," she signs off.
 source: The Times of india

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Sunday, 6 November 2011

कैसे चलती है न्यूज़ वेबसाइट बिना विज्ञापन के ?


मै दस साल से मीडिया में हु , मगर मेरा दिमाग कभी कभी काम करना बंद कर देता है फिर सवाल उठता है ये न्यूज़ साईट बिना विज्ञापन के कैसे चलती है  |  आप न्यूज़ साईट देखेगे तो  विज्ञापन के नाम पर जीरो  है. | कल तक जो लोग झोला लेकर न्यूज़ के नाम पर भीख मांगते थे आज वह  अपने घर की रोटी न्यूज़ साईट से सेक रहे है | आखिर इसके पीछे का राज क्या है | 

१- क्या ये चोर है 
२- क्या ये धमका के पैसा वसूलते है
३- क्या ये न्यूज़ साईट चलाने के अलावा कुछ और काम के जरिये पैसा कमा रहे है 
४- क्या इनका परिवार साथ दे रहा है 
५- क्या ये नेताओ की दलाली करते है 
६- क्या स्टिंग करके  मोटा पैसा बसूल रहे है 

आप अगले लेख में उन पत्रकारों के बारे में पढेगे  जो कल तक ज्रीरो थे आज वह हीरो बनके घूम रहे है  अगर आपको किसी पत्रकार के बारे में जानकारी हो तो हमें मेल और फ़ोन करे |

एडिटर
सुशील गंगवार 
फ़ोन -09167618866
सुशील_गंगवार@रेदिफ्फ्मैल.कॉम 

Sabhar:- Sakshatkar.com

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Anna Hazare being guided towards political ambitions: Prithviraj Chavan


NEW DELHI: Anna Hazare never had political ambitions but someone is guiding him towards it, Maharashtra chief minister Prithviraj Chavanhas said.

"He was reasonable, worked within the system. I don't know what has happened now. He never previously had political ambitions," Chavan said in an interview to TV channel.

"Definitely someone is guiding him towards political ambitions," the channel quoted Chavan as saying in a press release.

The chief minister denied that there was any rift with key ally NCP but admitted that in a coalition government there were difficulties in decision-making.

Chavan indicated that in the upcoming polls to the Mumbai Municipal Corporation, the Congress and NCP will fight separately just as they had done in all local elections before.

He also hit out at his critics for saying decision-making has become slow after he took over as chief minister last year.

"Yes, a businessman cannot walk into the offices of officials and leaders and get their files cleared personally. If you call that speedy decision-making then that's a different kind of governance," Chavan said.

Chavan said he had introduced fool-proof measures and ushered in transparency to ensure that the land scams that occurred before he took over do not occur again.
source : The Times of india

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कभी पानी-आईसक्रीम बेचता था यह अरबपति!





कहते हैं कि इरादे मजबूत हों तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। इस बात को बिल्कुल सही साबित कर दिखाया है चीन के एक कारोबारी ने। चेन गुआंगबियो का नाम आज चीन के गिने चुने दौलतमंद लोगों में शुमार है। लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इनका बचपन बेहद गरीबी में गुजरा है।

चेन के अमीर बनने की कहानी एकदम फिल्मी है। चेन का जन्म अंहुई प्रांत के एक गरीब परिवार में हुआ। उनके दो भाई-बहन की मौत भूख से हो गई। उसके बाद स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने पानी की बोतल और आइसक्रीम बेचकर कमाई शुरू की।

करीब 22 साल पहले 1988 में उन्होंने अपनी कंपनी हुआंगपू रिन्यूएबल रिसोर्सेज की शुरुआत की। कंस्ट्रक्शन कंपनियों के वेस्ट मटेरियल को रिसाइकल करते-करते उन्होंने 44 करोड़ डॉलर यानी करीब 20 अरब रुपये का अंपायर खड़ा किया।

आपको बता दें कि दुनिया के दो प्रमुख अरबपतियों- बिल गेट्स और वारेन बफे दुनियाभर के अमीरों से उनकी अपनी संपत्ति का एक हिस्सा दान करने की अपील कर रहे हैं। चीन से संपत्ति दान करने वाले चेन पहले अरबपति हैं। गेट्स और बफे की अपील के बाद चेन ने यह ऐलान किया है कि मरने के बाद वो अपनी सारी संपत्ति दान कर देंगे।

Sabhar:- Bhaskar.com

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300 रुपए से 700 करोड़ रुपए का सफर, एक अरबपति की दास्तान






शौक के तौर पर शुरू किए श्रीमती रजनी बेक्टर के कैरियर ने उन्हें किचन से बोर्ड रूम तक पहुंचा दिया। श्रीमती बेक्टर ने क्रीमिका एग्रो फूड लि. की शुरूआत मात्र 300 रुपये से १९८२ में की थी।


आज कंपनी का व्यवसाय 700 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। मुख्य रूप से बेकरी, स्नेक्स और सॉस बनाने वाली यह कंपनी अपने प्रस्तावित आईपीओ के जरिये पूंजी बाजार से 800 से 1000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है।इस पूंजी से कंपनी अपनी भावी विस्तार योजनाओं को सिरे चढ़ाएगी। कंपनी अब दूध प्रोसेसिंग कारोबार में उतरने जा रही है। इसमें पैकेज्ड दूध के साथ-साथ दूध पाउडर बनाने की योजना शामिल है। तमाम फूड प्रॉडक्ट क्रीमिका एग्रो फूड के अलावा बेक्टर ग्रुप की मिसेज बेक्टर फूड स्पेशिएलिटीज लि. और दूसरी कंपनियों द्वारा बनाए जाते हैं।


शौक, लगन और मेहनत का ऐसा मेल हुआ कि किचन से बोर्ड रूम की मंजिल इनके लिए आसान हो गई। जिस दौर में महिलाओं पर कई तरह के पर्दे थे, उस दौर में कारोबार शुरु करने वाली गृहणी रजनी बैक्टर एक ऐसी महिला उद्यमी के रूप में उभरी कि वह आज की पढ़ी लिखी बोर्ड रूम संचालित करने वाली महिलाओं के लिए भी एक मिसाल हैं। फूड प्रॉडक्ट्स का इनका कारोबार अब क्रीमिका ब्रांड  के रुप में अपनी खास पहचान बना चुका है।बैकरी व स्नेक्स उत्पाद निर्माता क्रीमिका एग्रो फुड लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर रजनी बैक्टर ने अपने करियर की उड़ान भरने के साथ साथ सामाजिक सरोकार में भी अहम पैठ बनाई है। कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व निभाने के लिए इन्हें महिला उद्यमी के रुप में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं। बढ़ती उम्र के चलते उन्होंने कंपनी के कारोबार का दायित्व अपने बेटों एवं बहुओं पर डाल दिया है लेकिन अभी भी कंपनी को आगे ले जाने में उनकी मेहनत कम नहीं हुई है। 



पाकिस्तान कराची में जन्मी रजनी बैक्टर के मुताबिक उनकी पढ़ाई दिल्ली में ही हुई है। शादी के बाद वह लुधियाना की हो गईं। अपने पति का सहयोग मिलने के चलते उन्होंने अपना नाम फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में स्थापित किया है। उन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत क्लबों या अन्य तरह के लगने वाले मेलों में अपने उत्पाद आईसक्रीम से की थी। यह शुरुआत 300 रुपये में हुई थी।इस राशि से उन्होंने हाथ चालित मशीन एवं छोटे से ओवन से आइसक्रीम बनानी शुरु की थी। मेलों में उन्हें काफी अच्छा प्रतिसाद मिला। इसके चलते उन्होंने अपने कारोबार को आगे फैलाने की योजना बनाई। इसके तहत ही उन्होंने 80 के दशक में क्रिमिका कंपनी रजिस्टर्ड करवाई। उस दौरान उनका कंपनी में निवेश 20 हजार रुपये का था। 


श्रीमती बेक्टर बताती हैं कि उनके उत्पादों की अच्छी गुणवत्ता के चलते ही मैक-डोनाल्ड ने देश में अपने कारोबार की शुरूआत से ही उनकी कंपनी के सॉस एवं बंद का इस्तेमाल करना शुरू किया। उनका कहना है कि मैकडोनाल्ड के रेस्टोरेंटों में 80 फीसदी उत्पाद बेक्टर के ही इस्तेमाल हो रहे हैं।कंपनी के बिस्कुट एवं सॉस यूरोपीयन एवं अफ्रीकी देशों में भी निर्यात हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जब भी बिस्कुटों की मांग होती है तो उन्हें आर्डर जरुर मिलता है। इस मेहनत की बदौलत अब उनका कारोबार 700 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।श्रीमती बैक्टर के मुताबिक, शादी के दौरान उनके पति धर्मवीर बेक्टर अपने पुश्तैनी फर्टिलाइजर कारोबार से जुड़े हुए थे। उस दौरान उन्हें आइसक्रीम तैयार कर इसे दूसरों को परोसने का काफी शौक था जिसे उन्होंने प्रोफेशन के रुप में आगे बढ़ाना शुरु किया।इसमें उनके पति की तरफ से पूरा सहयोग मिला जिसके चलते वह इस कारोबार में आगे बढऩे में सफल हो पाई हैं। देश भर से चुनी गई बीस सफल महिलाओं में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से सम्मान हासिल हुआ था। वहीं राज्य स्तर पर भी वह बड़ी संख्या में सम्मान हासिल कर चुकी हैं। 



ब्रेड, आइसक्रीम, बिस्कुट, सॉस, बंद के उत्पादों के साथ साथ अब कंपनी ने अपने कारोबार में विस्तार की योजना बनाई है। इसके साथ ही, कंपनी जल्द ही 800 से 1000 करोड़ रुपये का आईपीओ भी बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।कंपनी की आगामी योजनाओं में दूध प्रोसेसिंग क्षेत्र भी शामिल है जिससे कंपनी अपने कारोबार में विस्तार करेगी। इसमें पैकेज्ड दूध के साथ साथ दूध पाउडर तैयार करने की योजना बनाई गई है।

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ये कॉलेज की पढ़ाई नहीं कर पाए लेकिन बन गए अरबपति







कहते हैं तरक्की करने के लिए अच्छी तालीम हासिल करना बहुत जरूरी है। लेकिन हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए। लेकिन आज इनका नाम दुनिया के गिने चुने रईसों में शामिल है। इस लिस्ट में पहला नाम है दुनिया की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख बिल गेट्स का। साल 1975 में इन्होंने अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। और इसके कुछ दिनों के बाद ही इन्होंने माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की शुरूआत की। और आज इनका नाम दुनिया के चुनिंदा सफल कारोबारियों में शुमार है।


इसी तरह डेल कंपनी के संस्थापक माइकल डेल भी अपनी पढ़ाई पुरी नहीं कर पाए। महज 12 साल की छोटी उम्र में ही इन्होंने अपना कारोबार शुरू कर दिया था। आगे चलकर इन्होंने कंप्यूटर बनाने वाली जानी मानी कंपनी डेल की स्थापना की।


स्टीव जॉब्स की कंपनी एप्पल का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। लेकिन शायद आप ये नहीं जानते होंगे की स्टीव ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई, पहले सेमेस्टर के बाद ही छोड़ दी थी। महज 20 साल की उम्र में ही इन्होंने अपने एक मित्र के साथ मिल कर एप्पल 1 का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया था।


दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड मोटर्स के फाउंडर हेनरी फोर्ड का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। हेनरी ने स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद कॉलेज में दाखिला ही नहीं लिया। इसके बावजूद अपनी काबिलियत के दम पर इन्होंने इतनी बड़ी कंपनी की शुरूआत की।
Sabhar:- Bhaskar.com

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Thursday, 13 October 2011

Bhutan king weds commoner bride

PUNAKHA, BHUTAN: The king of the tiny Himalayan nation of Bhutan married his commoner bride on Thursday in an ancient Buddhist ceremony at the country's most sacred monastery fortress.

King Jigme Khesar Namgyal Wangchuck, wearing the raven crown, came down from his golden throne in front of a huge statue of Buddha to place a smaller, silk brocade crown upon the head of his bride, Jetsun Pema. Monks chanted in celebration as she took her seat beside him as the new queen of the country.

The wedding has captivated the nation, which had grown impatient with their 31-year-old bachelor king's lack of urgency to wed. Children composed poems, flight attendants practiced celebratory dances and posters of the couple were nearly ubiquitous.

The celebrations began at 8:20am _ a time set by royal astrologers _ when the king, wearing the royal yellow sash, walked into the courtyard of the 17th century monastery in the old capital of Punakha and proceeded up the high staircase inside. A few minutes later, his 21-year-old bride arrived at the end of a procession of red-robed monks and flag bearers across a wooden footbridge over the wide, blue river beside the fort and followed him inside.

Singers chanted songs of celebration amid the clanging of drums and the drone of long dhung trumpets.

She wore a traditional wraparound skirt with a gold jacket with deep red cuffs.

Inside, the nation's top cleric, who presided over the wedding, performed a purification ceremony for the couple in front of a massive 100-foot Thongdal tapestry of Bhutan's 17th century founder.

The pair then proceeded to the temple for a ceremony broadcast live on national television, save for a few minutes when the king, his father _ the former ruler _ and the cleric entered the sacred tomb of the founder of Bhutan.

The king's father gave the bride an array of five colored scarves representing blessings from the tomb. Hesitantly, she then approached the king's throne with a golden chalice filled with the ambrosia of eternal life. They held it together for several seconds and then he drank.

He came down from the throne and placed the crown on her head. After she took her place as queen, the newly married couple was feted by monks playing deep tones on traditional trumpets and pounding drums. Well-wishers gave them offerings representing hopes for long life.

source: Times of india

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Tuesday, 11 October 2011

Jagjeet singh

मुंबई. गजल सम्राट जगजीत सिंह के अंतिम संस्‍कार की तैयारी चल रही है। आज शाम चंदनवाड़ी में उनका अंतिम संस्‍कार किया जाएगा। सोमवार को ब्रेन हैमरेज के चलते उनका निधन हो गया था। लेकिन बताया जाता है कि यह उनके निधन का तात्‍कालिक कारण था। असल में उनका निधन उस दर्द के चलते हुआ, जो उन्‍हें जवान बेटे की मौत के बाद मिला था।
मशहूर गायिका आशा भोंसले के मुताबिक जगजीत कभी भी लोगों के साथ अपना दुख नहीं बांटते थे और न ही लोगों के सामने उसे जाहिर होने देते थे। वह याद करती हैं कि जब उनके बेटे के निधन के बाद उन्‍हें सांत्‍वना देने गई थीं, तब उन्‍होंने कहा था कि इस बारे (बेटे की मौत) में बात नहीं करें। बकौल आशा, वह सारा गम अपने सीने में दबा कर रखते थे और शायद इसका उनकी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ा।

1990 में जगजीत और चित्रा के बेटे विवेक की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद जगजीत को जुबां पर गीत लाने में छह महीने लग गए थे और चित्रा की आवाज तो खामोश ही हो गई थी। चित्रा दो साल पहले अपनी बेटी को भी खो चुकी हैं। उनकी पहली शादी से जन्‍मी मोनिका ने बांद्रा के अपने फ्लैट में खुदकुशी कर ली थी।

जगजीत शुरू से ही अंतरमुखी स्‍वभाव के थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि किशोरावस्था में वे एक लड़की पर फिदा हो गए थे। जालंधर में पढ़ाई के दौरान साइकिल पर ही आना-जाना होता था। लड़की के घर के सामने साइकिल की चेन टूटने या हवा निकलने का बहाना कर बैठ जाते और उसे देखा करते थे। बहरहाल, उनका यह प्यार परवान नहीं चढ़ सका था।

जगजीत सिंह के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता है कि कपड़े प्रेस करना उनकी हॉबी थी। उन्हें घुड़दौड़ का भी बहुत शौक था, उन्होंने घोड़े पाले भी थे। बचपन में फिल्मों के शौक के चलते अक्सर सिनेमाहॉल में गेटकीपर को घूस देकर घुसते थे।

चैरिटी के अनेक कार्यों में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। कई समाजसेवी संस्थाओं के सहायतार्थ गाया। ‘क्राई फॉर क्राई’ एलबम भी निकाला। मेहदी हसन के इलाज के लिए उन्होंने पाकिस्तान जाकर तीन लाख रुपए की मदद की थी। अपने संघर्ष के दिनों को याद कर नए कलाकारों की मदद के लिए तैयार रहते थे।

कहां तुम चले गए...

ञ्च जन्म 8 फरवरी, 1941 को श्रीगंगानगर (राजस्थान) में। जन्म के समय पिता ने नाम दिया जगमोहन, पर अपने गुरु की सलाह पर बाद में कर दिया जगजीत।

ञ्च पीडब्ल्यूडी में कार्यरत, पिता अमर सिंह पंजाब में दल्ला गांव के मूल निवासी थे और मां थीं बचन कौर। आर्थिक हालात ये थे कि बकौल जगजीत, ‘पतंग और रेडियो भी लक्जरी हुआ करते थे।’ शुरुआती साल बीकानेर में बीते, फिर श्रीगंगानगर लौटे।

ञ्च पिता ने पं. छन्नूलाल शर्मा से संगीत की शिक्षा लेने भेजा। फिर छह साल उस्ताद जमाल खान से भी तालीम ली। कॉलेज के दिनों में एक रात चार हजार की भीड़ के सामने गा रहे थे कि बिजली चली गई। साउंड सिस्टम बैटरी के जरिए चालू रहा। जगजीत गाते रहे और क्या मजाल कि अंधेरे के बावजूद कोई उठकर गया हो!

ञ्च स्नातक शिक्षा के लिए वे डीएवी जालंधर पहुंचे। यहां आकाशवाणी ने उन्हें ‘बी’ वर्ग के कलाकार की मान्यता दी। 1962 में जालंधर में ही उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के लिए स्वागत गीत रचा।

ञ्च 1961 में वे मुंबई पहुंचे। संघर्ष में पैसे खत्म हो गए थे। इसी हालत में ट्रेन के शौचालय में छुपकर बिना टिकट जालंधर गए।

ञ्च मार्च 1965 में वे दुबारा मुंबई लौटे। सस्ती जगह पर रहते थे। खटमलों के साथ सोते थे। एक रात तो चूहे ने पैर काट खाया।

ञ्च छोटी-मोटी महफिलों, घरेलू आयोजनों, फिल्मी पार्टियों, विज्ञापन जिंगल्स आदि में गाते थे। इसी बीच एचएमवी ने एक रिकॉर्ड के लिए उनसे दो गजलें गवाईं। इसी के कवर पर छपने वाले चित्र के लिए उन्होंने पहली बार दाढ़ी और पगड़ी हटाई।

ञ्च एक जिंगल की रिकॉर्डिंग के दौरान अपनी भावी जीवन संगिनी चित्रा दत्ता से मिले। 19६९ में बिना धूम-धड़ाके, रिसेप्शन या उपहार के उनकी शादी हो गई। शादी पर खर्च हुए कुल जमा 30 रुपए।

ञ्च एक कमरे के मकान में रहते थे। 1971 में पुत्र विवेक का जन्म। आर्थिक मजबूरियां ऐसी कि चित्रा ने 20 दिन के बच्चे को गोद में लेकर माइक पर जिंगल गाया। बावजूद इसके जगजीत महसूस करते थे कि तब वे ‘दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति’ थे।

ञ्च 1975 में एचएमवी से पहला एलपी ‘द अनफॉरगेटबल्स’ आया। इसकी रिकॉर्ड कामयाबी के बाद उन्होंने मुंबई में फ्लैट खरीदा।

ञ्च 1980 में फिल्म ‘साथ-साथ’ और ‘अर्थ’ में स्वर और संगीत दिया। 1987 में उनका ‘बियॉन्ड टाइम’ देश का पहला संपूर्ण डिजिटल सीडी एलबम बना। अगले साल टीवी सीरियल ‘मिर्जा गालिब’ में स्वर और संगीत दिया।

ञ्च 28 जुलाई, 1990 को एकमात्र पुत्र विवेक की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद आध्यात्मिकता और दर्शन की ओर झुकाव बढ़ा। पहला एलबम आया ‘मन जीते जगजीत’ (गुरबानी)।

ञ्च संगीत के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता कि 2001 में मां के अंतिम संस्कार के बाद उसी दोपहर कोलकाता में पूर्व निर्धारित कॉन्सर्ट के लिए पहुंचे।

ञ्च 2003 में पद्मभूषण सम्मान मिला।

ञ्च नई दिशा (1999) व संवेदना (2002) के लिए प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के गीतों को सुर और संगीत दिया।

ञ्च 10 मई, 2007 को संसद के केंद्रीय कक्ष में प्रस्तुति दी।

लोकप्रिय एलबम
इकोज, द अनफॉरगेटबल्स, माइलस्टोन, कम अलाइव, द लेटेस्ट, बियॉन्ड टाइम, साउंड अफेयर, कहकशां, मिर्जा गालिब (सभी चित्रा सिंह के साथ) फेस टू फेस, लाइव विद जगजीत सिंह, मरासिम, मिराज, इनसाइट, क्राई फॉर क्राई, मां, सांवरा, हे राम।
यादगार गजलें
सरकती जाए है रुख से नकाब.., ये दौलत भी ले लो.., किया है प्यार जिसे.., मेरी जिंदगी किसी और की.., कोई चौदहवीं रात का चांद बनकर.., चराग आफताब गुम.., झूम के जब रिंदों ने पिला दी.., पहले तो अपने दिल की रजा जान जाइए.., मैं नशे में हूं.., अपने होंठों पर सजाना चाहता हूं.., जब किसी से कोई गिला रखना.., सच्ची बात कही थी मैंने.., कोई पास आया सवेरे-सवेरे...।
लोकप्रिय गीत
होंठों से छू लो तुम...(प्रेमगीत), झुकी झुकी सी नजर..(फिल्म अर्थ) तुमको देखा तो...(साथ-साथ), तुम इतना जो मुस्करा रहे हो...(अर्थ), फिर आज मुझे तुमको...(आज), हमसफर बनके हम...(आशियां), चिट्ठी न कोई संदेश...(दुश्मन), होशवालों को खबर क्या...(सरफरोश)।
by sushil gangavar

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