https://representationfighter.com/n58ycn2mt3?key=2c973e53eb2656c351cd1ceefe600fcf एम्स में आने वाले मरीजों को मुफ्त जेनेरिक दवा मिलेगी | wordmedia.in

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Tuesday, 7 January 2014

एम्स में आने वाले मरीजों को मुफ्त जेनेरिक दवा मिलेगी

सुशील कुमार त्रिपाठी, नई दिल्ली
देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब ओपीडी में आने वाले मरीजों को मुफ्त जेनेरिक दवा मिलेगी। इसके लिए जल्द ही एक फॉर्मेसी काम करना शुरू कर देगी। यह फॉर्मेसी सेंट्रल गवर्नमेंट के अंडर में होगी। फॉर्मेसी पर वही दवाइयां मुफ्त दी जाएंगी जो एम्स के डॉक्टर मरीज के लिए पर्चे पर लिखेंगे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जनवरी के मध्य तक यह फॉर्मेसी शुरू हो जाएगी। यह अस्पताल के सभी विभागों के लिए सेंट्रलाइज्ड सप्लाई सिस्टम के रूप में काम करेगी।

एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर डीके शर्मा के मुताबिक, यह योजना काफी पहले बनाई गई थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से अभी तक शुरू नहीं हो पाई। लेकिन अब इस पर सभी काम कर लिए गए हैं और जल्द ही शुरू हो जाएगी। डॉ. शर्मा का कहना है यह फॉर्मेसी उसी जगह होगी जहां कुछ दिन पहले तक एक अस्थाई शेल्टर बना हुआ था। वहां सारे काम पूरे कर लिए गए हैं।

गौरतलब है कि एम्स ऑटोनॉमस बॉडी की तरह काम करता है। अभी तक यहां मुफ्त दवा वितरण जैसा कोई सिस्टम नहीं था। काफी दिनों से इसकी मांग चल रही थी। इसे देखते हुए 5 साल पहले योजना बनाई गई थी, जिसे करीब दो साल पहले हरी झंडी भी मिल गई थी। लेकिन यह अमल में नहीं आ सकी। अब मरीजों को इसका लाभ मिलना शुरू होगा। दवाइयों की लिस्ट के लिए सभी विभागों से बात की गई है। उसी हिसाब से उनकी उपलब्धता पर जोर दिया जाएगा।
बंद हो चुकी है सब्सिडी वाली दुकान: कुछ दिन पहले तक एम्स में एक सब्सिडी वाली दवा की दुकान चल रही थी। वहां डॉक्टर के पर्चे पर मरीजों को 56 फीसदी छूट पर दवा देने का प्रावधान था। लेकिन जबसे वह दुकान खुली तभी से वहां की तमाम शिकायतें आ रही थीं। शिकायत होती थी कि जानबूझकर दवा नहीं दी जाती, बची हुई दवा कुछ दाम कमकर बाहर की दुकानों पर दे दी जाती थी। इससे मरीजों को काफी दिक्कतें हो रही थीं। घंटे भर लाइन लगाकर पहुंचने के बाद कह दिया जाता था कि दवा नहीं हैं। जांच में एम्स प्रशासन ने शिकायतें सही पाईं और हाल ही में वह दुकान बंद कर दी गई। तबसे मरीजों को पूरे दाम पर दवा बाहर से लेनी पड़ रही थी।

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